पशुपालन भारत की अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन और आय वृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान देता है। भारत सरकार और विभिन्न वित्तीय संस्थानों ने पशुपालकों को आर्थिक सहायता प्रदान करने के लिए कई योजनाएँ शुरू की हैं, जिनमें से एक है **पशुपालन लोन योजना**। यह योजना उन किसानों और पशुपालकों के लिए बनाई गई है जो अपने पशुपालन व्यवसाय को शुरू करना चाहते हैं या इसे और विस्तार देना चाहते हैं। इस लेख में, हम इस योजना के बारे में विस्तार से जानेंगे, जिसमें इसके उद्देश्य, पात्रता, लोन के प्रकार, ब्याज दर, सब्सिडी, आवेदन प्रक्रिया, और आवश्यक दस्तावेज़ शामिल हैं। यह लेख पशुपालकों को इस योजना का लाभ उठाने में मदद करेगा और उनके व्यवसाय को बढ़ाने के लिए उपयोगी जानकारी प्रदान करेगा।
पशुपालन लोन योजना क्या है?
पशुपालन लोन योजना एक ऐसी सरकारी पहल है जो पशुपालकों और किसानों को वित्तीय सहायता प्रदान करती है ताकि वे अपने पशुपालन व्यवसाय को शुरू कर सकें या उसे और बेहतर बना सकें। इस योजना के तहत, सरकार और विभिन्न वित्तीय संस्थान कम ब्याज दरों पर लोन प्रदान करते हैं, जिससे पशुपालक पशुओं की खरीद, उनके पालन-पोषण, चारे, दवाइयों, और अन्य संबंधित खर्चों के लिए पूंजी प्राप्त कर सकते हैं। यह योजना विशेष रूप से छोटे और मध्यम स्तर के किसानों के लिए बनाई गई है,
पशुपालन लोन योजना के मुख्य उद्देश्य
पशुपालन लोन योजना का उद्देश्य न केवल पशुपालकों को आर्थिक सहायता प्रदान करना है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना और रोजगार के अवसर पैदा करना भी है। इस योजना के कुछ प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं:
1.पशुपालन व्यवसाय को बढ़ावा देना:- यह योजना पशुपालकों को अपने व्यवसाय को विस्तार देने और आधुनिक तकनीकों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करती है। 2.आर्थिक सशक्तिकरण:- छोटे और मध्यम स्तर के किसानों को वित्तीय सहायता देकर उनकी आय में वृद्धि करना। 3. ग्रामीण रोजगार सृजन:- पशुपालन व्यवसाय को बढ़ावा देकर ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा करना। 4. पशुधन की गुणवत्ता में सुधार:- पशुओं के स्वास्थ्य, चारे, और देखभाल के लिए संसाधन उपलब्ध कराकर पशुधन की उत्पादकता बढ़ाना। 5. कृषि और पशुपालन का एकीकरण:- पशुपालन को कृषि के साथ जोड़कर एक टिकाऊ और लाभकारी व्यवसाय मॉडल विकसित करना।
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लोन राशि: लोन की राशि पशुपालक की आवश्यकता और व्यवसाय के आकार के आधार पर तय की जाती है। यह राशि ₹30,000 से शुरू होकर लाखों रुपये तक हो सकती है।
कम ब्याज दर: इस योजना के तहत लोन पर ब्याज दर सामान्यतः 7% से 10% के बीच होती है। कुछ सरकारी योजनाओं में यह दर और भी कम हो सकती है।
लोन की अवधि: लोन की अवधि आमतौर पर 3 से 5 साल तक होती है, जो व्यवसाय की प्रकृति और लोन राशि पर निर्भर करती है।
सब्सिडी:- कई योजनाओं में सरकार द्वारा 25% से 50% तक की सब्सिडी प्रदान की जाती है, जिससे लोन का बोझ कम होता है।
लचीलापन:- यह लोन विभिन्न प्रकार के पशुपालन कार्यों जैसे दूध उत्पादन, मांस उत्पादन, मुर्गी पालन, और पशु चिकित्सा के लिए उपलब्ध है।
पशुपालन लोन योजना के लाभ
पशुपालन लोन योजना पशुपालकों के लिए कई तरह के लाभ प्रदान करती है, जो उनके व्यवसाय को बढ़ाने और आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में मदद करते हैं। कुछ प्रमुख लाभ निम्नलिखित हैं:
1. वित्तीय सहायता: पशुपालकों को पशुओं की खरीद, चारा, दवाइयाँ, और अन्य संसाधनों के लिए पूंजी उपलब्ध होती है। 2. कम ब्याज दर: अन्य व्यावसायिक लोन की तुलना में इस योजना में ब्याज दर कम होती है, जिससे पुनर्भुगतान आसान होता है। 3. सब्सिडी का लाभ: सरकार द्वारा प्रदान की जाने वाली सब्सिडी लोन की राशि को कम करती है, जिससे पशुपालकों पर वित्तीय बोझ कम पड़ता है। 4. रोजगार सृजन: यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा करती है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलता है। 5.आधुनिक तकनीकों का उपयोग: लोन की मदद से पशुपालक आधुनिक तकनीकों और उपकरणों में निवेश कर सकते हैं, जिससे उनकी उत्पादकता बढ़ती है। 6. आय में वृद्धि: पशुपालन व्यवसाय के विस्तार से पशुपालकों की आय में वृद्धि होती है, जिससे उनकी जीवनशैली में सुधार होता है।
पशुपालन लोन योजना के तहत मिलने वाली लोन राशि
पशुपालन लोन योजना के तहत मिलने वाली लोन राशि कई कारकों पर निर्भर करती है, जैसे कि पशुपालक का व्यवसाय, पशुओं की संख्या, और उनके व्यवसाय की योजना। सामान्यतः, लोन राशि निम्नलिखित रूपों में प्रदान की जाती है:
1. दूध उत्पादन के लिए लोन
लोन राशि: प्रति गाय या भैंस के लिए ₹40,000 से ₹50,000 तक। यदि अधिक पशु पाले जा रहे हैं, तो राशि बढ़ सकती है।
उपयोग: गाय, भैंस, या बकरियों की खरीद, उनके चारे, बाड़, और स्वास्थ्य देखभाल के लिए।
उदाहरण: यदि कोई पशुपालक 10 गायों के लिए लोन लेना चाहता है, तो उसे ₹4,00,000 से ₹5,00,000 तक का लोन मिल सकता है।
2. मांस उत्पादन के लिए लोन
लोन राशि: प्रति पशु ₹30,000 से ₹40,000 तक।
उपयोग: बकरियों, मुर्गियों, या अन्य मांस उत्पादन के लिए पशुओं की खरीद और उनके पालन-पोषण के लिए।
उदाहरण: यदि कोई पशुपालक 20 बकरियों के लिए लोन लेना चाहता है, तो उसे ₹6,00,000 से ₹8,00,000 तक का लोन मिल सकता है।
3. पशु चिकित्सा और स्वास्थ्य देखभाल के लिए लोन
लोन राशि: ₹10,000 से ₹20,000 प्रति पशु।
उपयोग: पशुओं के टीकाकरण, दवाइयों, और अन्य चिकित्सा खर्चों के लिए। उदाहरण: यदि पशुपालक के पास 5 पशु हैं और वह उनके स्वास्थ्य देखभाल के लिए लोन लेना चाहता है, तो उसे ₹50,000 से ₹1,00,000 तक का लोन मिल सकता है।
4. चारा और अन्य संसाधनों के लिए लोन
लोन राशि: ₹10,000 से ₹50,000 तक।
उपयोग: चारा खरीदने, पानी की व्यवस्था, और अन्य संसाधनों के लिए।
उदाहरण: यदि पशुपालक को चारे और बाड़ के लिए लोन चाहिए, तो वह अपनी आवश्यकता के आधार पर ₹50,000 तक का लोन ले सकता है।
5. बड़े पैमाने के पशुपालन व्यवसाय के लिए
लोन राशि*: लाखों रुपये तक, व्यवसाय के आकार और योजना के आधार पर।
उपयोग**: बड़े पैमाने पर पशुपालन, जैसे डेयरी फार्म, पोल्ट्री फार्म, या बायो-गैस प्लांट स्थापित करने के लिए। - **उदाहरण**: यदि कोई पशुपालक डेयरी फार्म शुरू करना चाहता है जिसमें 50 गायें हों, तो उसे ₹20,00,000 से ₹25,00,000 तक का लोन मिल सकता है।
लोन राशि का निर्धारण
लोन राशि का निर्धारण निम्नलिखित कारकों पर आधारित होता है: व्यवसाय का आकार: छोटे, मध्यम, या बड़े पैमाने का व्यवसाय। पशुओं की संख्या और प्रकार: गाय, भैंस, बकरी, मुर्गी आदि। आवश्यकता: चारा, बाड़,दवाइयाँ, उपकरण आदि। बैंक की नीतियाँ: विभिन्न बैंकों की लोन नीतियाँ अलग-अलग हो सकती हैं।
पशुपालकों को सलाह दी जाती है कि वे अपने नजदीकी बैंक या वित्तीय संस्थान से संपर्क करें ताकि सटीक लोन राशि और शर्तों की जानकारी प्राप्त हो सके।
पशुपालन लोन पर ब्याज दर और सब्सिडी
पशुपालन लोन योजना के तहत ब्याज दर और सब्सिडी की सुविधाएँ पशुपालकों के लिए बहुत आकर्षक होती हैं। ये सुविधाएँ लोन के बोझ को कम करती हैं और व्यवसाय को बढ़ाने में मदद करती हैं।
ब्याज दर सामान्य ब्याज दर: पशुपालन लोन पर ब्याज दर आमतौर पर 7% से 10% के बीच होती है। यह दर बैंक और योजना के आधार पर भिन्न हो सकती है। विशेष योजनाएँ: कुछ सरकारी योजनाओं, जैसे **प्रधानमंत्री मुद्रा योजना** या **राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (NADP)**, के तहत ब्याज दर 5% से 7% तक कम हो सकती है। ब्याज सब्सिडी: कुछ योजनाओं में ब्याज पर सब्सिडी का प्रावधान होता है, जिससे प्रभावी ब्याज दर और कम हो जाती है।
सब्सिडी
सब्सिडी की राशि: सरकार द्वारा विभिन्न योजनाओं के तहत 25% से 50% तक की सब्सिडी प्रदान की जाती है। यह सब्सिडी लोन की राशि पर लागू होती है। उदाहरण यदि किसी पशुपालक को ₹1,00,000 का लोन मिलता है और योजना के तहत 25% सब्सिडी दी जाती है, तो उसे ₹25,000 की सब्सिडी मिल सकती है, जिससे उसे केवल ₹75,000 चुकाने होंगे। राज्य-विशिष्ट सब्सिडी: विभिन्न राज्यों में सब्सिडी की दरें और शर्तें अलग-अलग हो सकती हैं। उदाहरण के लिए, कुछ राज्यों में अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के पशुपालकों को अतिरिक्त सब्सिडी मिल सकती है। सब्सिडी के प्रकार: सब्सिडी लोन की मूल राशि पर या ब्याज पर दी जा सकती है, जो योजना के आधार पर तय होता है।
नोट ब्याज दर और सब्सिडी की सटीक जानकारी के लिए पशुपालकों को अपने बैंक या वित्तीय संस्थान से संपर्क करना चाहिए। कुछ योजनाओं में सब्सिडी का लाभ लेने के लिए विशेष दस्तावेज़ या पात्रता मानदंड पूरे करने पड़ सकते हैं।
पशुपालन लोन योजना की पात्रता
पशुपालन लोन योजना का लाभ उठाने के लिए कुछ पात्रता मानदंड पूरे करने पड़ते हैं। ये मानदंड यह सुनिश्चित करते हैं कि लोन सही व्यक्ति तक पहुँचे और इसका उपयोग पशुपालन व्यवसाय के लिए हो। सामान्य पात्रता मानदंड निम्नलिखित हैं:
1. किसान और पशुपालक आवेदक को किसान या पशुपालक होना चाहिए, जो पशुपालन व्यवसाय में सक्रिय रूप से शामिल हो या इसमें निवेश करना चाहता हो। पशुपालन का उद्देश्य दूध उत्पादन, मांस उत्पादन, मुर्गी पालन, या अन्य संबंधित गतिविधियाँ हो सकता है।
2. आयु सीमा अधिकतम आयु सीमा आमतौर पर 60 वर्ष तक होती है, जो बैंक की नीतियों पर निर्भर करती है।
3. स्थायी निवास - कुछ योजनाओं में स्थानीय निवास प्रमाणपत्र की आवश्यकता हो सकती है।
4. कृषि भूमि और संसाधन पशुपालन के लिए पर्याप्त भूमि या संसाधन होने चाहिए। हालांकि, बिना जमीन के भी कुछ योजनाओं के तहत लोन लिया जा सकता है। यदि आवेदक किराए की जमीन पर पशुपालन करना चाहता है, तो उसे किराए का समझौता (रेंट एग्रीमेंट) प्रस्तुत करना पड़ सकता है।
5. पशुपालन का अनुभव - नए आवेदकों को पशुपालन प्रशिक्षण प्रमाणपत्र या व्यवसाय योजना प्रस्तुत करनी पड़ सकती है।
6. क्रेडिट हिस्ट्री - आवेदक का क्रेडिट स्कोर अच्छा होना चाहिए। यदि पहले कोई लोन लिया गया है, तो उसका समय पर भुगतान किया गया होना चाहिए। - कुछ बैंकों में क्रेडिट हिस्ट्री की जाँच अनिवार्य होती है।
7. कृषि योजनाओं का लाभ: - यदि आवेदक के पास किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) या अन्य कृषि योजनाओं का लाभ है, तो उसे प्राथमिकता मिल सकती है।
8. व्यवसाय योजना - आवेदक को पशुपालन व्यवसाय की एक विस्तृत योजना प्रस्तुत करनी होगी, जिसमें पशुओं की संख्या, चारे की व्यवस्था, बाड़, और अन्य खर्चों का विवरण शामिल हो।
### नोट - पात्रता मानदंड बैंक और राज्य सरकार की नीतियों के आधार पर भिन्न हो सकते हैं। - आवेदन करने से पहले अपने नजदीकी बैंक से पात्रता की पूरी जानकारी प्राप्त करें।
## पशुपालन लोन योजना के तहत लोन के प्रकार
पशुपालन लोन योजना के तहत विभिन्न प्रकार के लोन उपलब्ध हैं, जो पशुपालकों की विभिन्न आवश्यकताओं को पूरा करते हैं। ये लोन निम्नलिखित हैं:
1. दूध उत्पादन के लिए लोन उद्देश्य: गाय, भैंस, या बकरियों की खरीद और उनके पालन-पोषण के लिए। लोन राशि: प्रति पशु ₹30,000 से ₹50,000 तक। उपयोग: चारा, बाड़, दवाइयाँ, दूध निकालने की मशीनें, और अन्य संसाधन। लाभ: डेयरी व्यवसाय को बढ़ावा देना और दूध उत्पादन में वृद्धि करना।
2. मांस उत्पादन के लिए लोन उद्देश्य: बकरियों, मुर्गियों, या अन्य मांस उत्पादन के लिए पशुओं की खरीद। लोन राशि: प्रति पशु ₹30,000 से ₹40,000 तक। उपयोग: पशुओं की खरीद, चारा, स्वास्थ्य देखभाल, और बाड़। लाभ: मांस उत्पादन व्यवसाय को बढ़ावा देना और आय में वृद्धि करना।
3. मुर्गी पालन (पोल्ट्री फार्मिंग) के लिए लोन उद्देश्य: मुर्गी पालन व्यवसाय शुरू करना या विस्तार करना। लोन राशि: व्यवसाय के आकार के आधार पर ₹50,000 से लाखों रुपये तक। उपयोग: मुर्गियों की खरीद, चारा, बाड़, और अंडा उत्पादन के लिए उपकरण। लाभ अंडा और मांस उत्पादन के लिए एक लाभकारी व्यवसाय मॉडल।
4. पशु चिकित्सा और स्वास्थ्य देखभाल के लिए लोन उद्देश्य: पशुओं के टीकाकरण, दवाइयों, और चिकित्सा खर्चों के लिए। - **लोन राशि**: प्रति पशु ₹10,000 से ₹20,000 तक। - **उपयोग**: पशुओं की बीमारियों का इलाज और उनकी स्वस्थ स्थिति बनाए रखना। - **लाभ**: पशुओं की उत्पादकता और जीवनकाल में वृद्धि।
### 5. चारा और अन्य संसाधनों के लिए लोन - **उद्देश्य**: चारा, पानी, और अन्य आवश्यक संसाधनों की खरीद। - **लोन राशि**: ₹10,000 से ₹50,000 तक। - **उपयोग**: चारे की खरीद, पानी की व्यवस्था, और बाड़ का निर्माण। - **लाभ**: पशुओं के पोषण और देखभाल में सुधार।
### 6. फार्म मशीनरी और उपकरण के लिए लोन - **उद्देश्य**: पशुपालन के लिए आवश्यक मशीनों और उपकरणों की खरीद। - **उपयोग**: चारा काटने की मशीनें, दूध निकालने की मशीनें, और अन्य उपकरण। - **लाभ**: कार्यक्षमता में वृद्धि और समय की बचत।
### 7. बायो-गैस और वेस्ट मैनेजमेंट के लिए लोन - **उद्देश्य**: बायो-गैस प्लांट या वेस्ट मैनेजमेंट यूनिट की स्थापना। - **लोन राशि**: ₹1,00,000 से लाखों रुपये तक। - **उपयोग**: गोबर से बायो-गैस उत्पादन और पर्यावरणीय स्थिरता। - **लाभ**: पर्यावरण संरक्षण और अतिरिक्त आय का स्रोत।
### 8. आधुनिक पशुपालन और तकनीकी उन्नति के लिए लोन - **उद्देश्य**: आधुनिक तकनीकों और जेनेटिक सुधार में निवेश। - **लोन राशि**: व्यवसाय की आवश्यकता के आधार पर। - **उपयोग**: जेनेटिक सुधार, मशीनीकरण, और तकनीकी उन्नति। - **लाभ**: पशुधन की गुणवत्ता और उत्पादकता में वृद्धि।
## पशुपालन लोन के लिए आवश्यक दस्तावेज़
पशुपालन लोन लेने के लिए कुछ आवश्यक दस्तावेज़ जमा करने पड़ते हैं, जो आवेदक की पहचान, आय, और व्यवसाय की योजना को सत्यापित करते हैं। सामान्य दस्तावेज़ निम्नलिखित हैं:
1. **पहचान प्रमाण**: - आधार कार्ड - पैन कार्ड - वोटर आईडी कार्ड - पासपोर्ट (यदि उपलब्ध हो)
2. **पता प्रमाण**: - आधार कार्ड - बिजली/पानी का बिल - वोटर आईडी कार्ड - रेंट एग्रीमेंट (यदि किराए पर रहते हैं)
3. **पासपोर्ट साइज फोटो**: - हाल के 2-3 पासपोर्ट साइज फोटो।
4. **कृषि और पशुपालन दस्तावेज़**: - भूमि दस्तावेज़ (खसरा/खाता) - पशुपालन प्रमाणपत्र (यदि पहले से पशुपालन कर रहे हैं) - किसान क्रेडिट कार्ड (यदि उपलब्ध हो)
5. **आय प्रमाण**: - आय प्रमाणपत्र - 6-12 महीनों का बैंक स्टेटमेंट - सैलरी स्लिप (यदि नौकरी करते हैं)
6. **व्यवसाय योजना**: - पशुपालन की विस्तृत योजना - पशुओं की संख्या और प्रकार का विवरण - चारा, बाड़, और अन्य खर्चों का अनुमान
7. **क्रेडिट हिस्ट्री**: - क्रेडिट स्कोर/रिपोर्ट - पिछले लोन का भुगतान विवरण (यदि लागू हो)
8. **सहमति पत्र और गारंटी**: - लोन आवेदन पत्र पर हस्ताक्षर - गारंटर का पहचान और आय प्रमाण (यदि आवश्यक हो)
9. **वैकल्पिक दस्तावेज़**: - पशुपालन प्रशिक्षण प्रमाणपत्र - अतिरिक्त संपत्ति के दस्तावेज़
### नोट - सभी दस्तावेज़ प्रमाणित और सत्यापित होने चाहिए। - बैंक के आधार पर अतिरिक्त दस्तावेज़ मांगे जा सकते हैं।
## पशुपालन लोन की आवेदन प्रक्रिया
पशुपालन लोन प्राप्त करने के लिए निम्नलिखित चरणों का पालन करना होगा:
1. **योजना की जानकारी प्राप्त करें**: - अपने नजदीकी बैंक या वित्तीय संस्थान से पशुपालन लोन योजना की जानकारी लें। - यह सुनिश्चित करें कि योजना आपके व्यवसाय की आवश्यकताओं के अनुरूप है।
2. **आवश्यक दस्तावेज़ तैयार करें**: - सभी आवश्यक दस्तावेज़ (पहचान, पता, आय, व्यवसाय योजना आदि) इकट्ठा करें। - सुनिश्चित करें कि दस्तावेज़ सही और प्रमाणित हैं।
3. **बैंक में आवेदन करें**: - आवेदन पत्र में अपनी व्यक्तिगत जानकारी और व्यवसाय योजना का विवरण भरें।
4. **व्यवसाय योजना प्रस्तुत करें**: - पशुपालन की विस्तृत योजना जमा करें, जिसमें पशुओं की संख्या, चारा, और अन्य खर्चों का विवरण हो। - यह योजना बैंक द्वारा समीक्षा की जाएगी।
5. **दस्तावेज़ों की जाँच**: - बैंक आपके दस्तावेज़ों और क्रेडिट हिस्ट्री की जाँच करेगा। - यदि सब कुछ सही पाया जाता है, तो लोन स्वीकृति की प्रक्रिया शुरू होगी।
6. **लोन स्वीकृति और वितरण**: - लोन की शर्तें और ब्याज दर आपको सूचित की जाएँगी।
7. **पुनर्भुगतान**: - लोन की राशि को निर्धारित अवधि (3-5 साल) में चुकाना होगा। - पुनर्भुगतान की शर्तें बैंक की नीतियों पर आधारित होंगी।
### ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया कई बैंक अब ऑनलाइन आवेदन की सुविधा प्रदान करते हैं। ऑनलाइन आवेदन के लिए: - बैंक की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएँ। - पशुपालन लोन के लिए ऑनलाइन फॉर्म भरें। - आवश्यक दस्तावेज़ अपलोड करें।
## अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
### Q1. क्या पशुपालन लोन योजना के तहत ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है? **उत्तर**: हाँ, कई बैंक और वित्तीय संस्थान ऑनलाइन आवेदन की सुविधा प्रदान करते हैं। आपको बैंक की वेबसाइट पर जाकर आवेदन फॉर्म भरना होगा और दस्तावेज़ अपलोड करने होंगे। हालांकि, कुछ बैंकों में ऑफलाइन आवेदन अनिवार्य हो सकता है।
### Q2. पशुपालन लोन के लिए कम से कम कितने पशु होने चाहिए? **उत्तर**: लोन के लिए किसी निश्चित संख्या में पशु होने की आवश्यकता नहीं है। लोन राशि आपके व्यवसाय की योजना और पशुओं की संख्या पर निर्भर करती है। छोटे स्तर पर 1-2 पशु और बड़े स्तर पर 5-10 पशु पर्याप्त हो सकते हैं।
### Q3. क्या सब्सिडी सभी पशुपालकों को मिलती है? **उत्तर**: सब्सिडी योजना और राज्य सरकार की नीतियों पर निर्भर करती है। सामान्यतः 25% से 50% तक की सब्सिडी दी जाती है, लेकिन इसके लिए पात्रता मानदंड पूरे करने पड़ते हैं।
### Q4. लोन की अवधि कितनी होती है? **उत्तर**: लोन की अवधि आमतौर पर 3 से 5 साल तक होती है, जो लोन राशि और व्यवसाय की प्रकृति पर निर्भर करती है।